ऊँट चला

‘ऊँट चला’ कविता प्रयाग शुक्ल द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने एक ऊँट के क्रियाकलापों का वर्णन किया है।
ऊँट चला, भई ऊँट चला
हिलता डुलता ऊँट चला।
इतना ऊँचा ऊँट चला
ऊँट चला, भई ऊँट चला।
ऊँची गर्दन, ऊँची पीठ
पीठ उठाए ऊँट चला।
उपर्युक्त पंक्तियों में कवि कहता है कि हिलता-डुलता ऊँट चला जा रहा है। ऊँट का कद काफी ऊँचा है। वह ऊँची गर्दन तथा ऊँची पीठ किए चला जा रहा है।
नए शब्द
बालू-रेत।
करवट-हाथ या पीठ के बल लेटने की स्थिति।
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि कहता है कि बालू में ऊँट नहीं फँसेगा। वह इसमें भी बोझ ढो सकता है। जब ऊँट थककर बैठेगा तो वह किस करवट बैठेगा, कोई नहीं बता सकता। कवि पुनः कहता है कि ऊँट चलता जा रहा है, चलता ही जा रहा है।
बालू है, तो होने दो।
बोझ ऊँट को ढोने दो।
नहीं फँसेगा बालू में
बालू में भी ऊँट चला।
जब थककर बैठेगा ऊँट
किस करवट बैठेगा ऊँट?
बता सकेगा कौन भला
ऊँट चला, भई ऊँट चला।
झटपट कविता पढ़कर मज़ा लो।
कुछ ऊँट ऊँचा
कुछ पूँछ ऊँची
कुछ ऊँचे ऊँट की
पीठ ऊँची
अब जल्दी – जल्दी बोलकर देखो। जीभ लड़खड़ा गई न! कैसी लगी कविता?
ऊँट रेगिस्तान में ज्यादा मिलते हैं। नीचे चित्र बने हैं। चित्र को अपने कंप्यूटर के माउस के साथ खींचें और इसे सही जगह पर लगाओ।
बालू या रेत कहाँ-कहाँ पर मिलती है?
बालू या रेत समुद्र व नदी किनारे या रेगिस्तान में मिलती है।
गोला को अपने कंप्यूटर के माउस के साथ खींचें और इसे ऊँट से ऊँची चीज़ों के नाम पर लगाओ।
बछिया आम का पेड़ हाथी बिजली का खंभा तुम्हारी कक्षा की छत
नीचे कुछ शब्द लिखे हैं। इन्हें बोलकर देखो। अब अपने कंप्यूटर के माउस के साथ इन्हें खींचो और मिलते-जुलते शब्दों को सही खानों में रखो।
जूट सूट भला धंस हँस तब कब गला आलू चालू ऊंट बालू फॅंस चला जब
इस कविता में कुल कितनी बार ऊँट शब्द आया है? बिना देखे बताओ।
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